मूल नक्षत्र में जन्मे लोग
मूल, यानी जड़, परंपरा में गहराई और बुनियाद का नक्षत्र माना जाता है - ऐसे लोगों का जो बातों की तह तक पहुँचना चाहते हैं।
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मूल का अर्थ है जड़, और इसकी देवी निऋति हैं, जो वेदों में क्षय और विघटन की देवी हैं - जो अपना समय पूरा कर चुका, उसके बिखरने की अधिष्ठात्री - जैसे किसान पुरानी पराली साफ़ करता है ताकि खेत फिर से बोया जा सके। इस नक्षत्र का सम्मान एक कोमल रूप में भी होता है: देश के कई हिस्सों में नवरात्रि के दौरान जिस दिन चंद्रमा मूल में हो, उस दिन देवी सरस्वती का घर में आवाहन होता है और किताबें व वाद्य उनके सामने रखे जाते हैं। परंपरा मूल के लोगों में दोनों पहलू देखती है: ये बातों की जड़ तक पहुँचना चाहते हैं, और ज्ञान से, सिर्फ़ ज्ञान के लिए, प्रेम करते हैं।
नाम में क्या छिपा है
मूल का अर्थ है 'जड़', और इसका प्रतीक बँधी हुई जड़ों का गुच्छा है, वह छिपी नींव जिस पर ऊपर उगने वाला सब कुछ टिका है। परंपरा में नक्षत्र के हर चरण का बच्चे के नाम के लिए अपना अक्षर होता है, और जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में हो, उसी का अक्षर लिया जाता है: ये, यो, भा या भी।
स्वभाव
माना जाता है कि मूल नक्षत्र में चंद्रमा वाले लोग खोजी, सच्चे और सतह के नीचे के सत्य की ओर खिंचने वाले होते हैं। स्वामी ग्रह केतु इन्हें दार्शनिक बनाता है - दुनियादारी से थोड़ा अलग, मन से गहरा।
खूबियाँ
ये स्वभाव से खोजी होते हैं, और कई लोग शोध, चिकित्सा, क़ानून, दर्शन या धैर्य और गहराई वाले काम में सफल होते हैं। ये ईमानदार, सीधे और दूसरों की मानी बात पर सवाल उठाने से न डरने वाले होते हैं। जिस बात में विश्वास करें उसमें पूरा प्रयास लगाते हैं। जड़ से फिर शुरू करने की इनकी क्षमता इन्हें मज़बूत और अनुभव से समझदार बनाती है।
परिवार और विवाह में
पारिवारिक जीवन में ये सच्चे और वफ़ादार होते हैं, हालाँकि भावनाओं के बारे में संकोची हो सकते हैं। परिवार के लिए सही करने की इन्हें परवाह होती है, और गंभीर मामलों में अक्सर ये परिवार की विचारशील आवाज़ बनते हैं। इनकी सीधी बात कभी रूखी लग सकती है, इसलिए कभी-कभी नरम शब्द आसपास वालों को उसके पीछे की गहरी परवाह महसूस कराता है।
कैसा जीवनसाथी भाता है
धैर्यवान, समझदार और ज़मीन से जुड़ा जीवनसाथी इनके लिए अच्छा रहता है, जो अर्थ की इनकी खोज का सम्मान करे और सोचने की जगह दे। इनके लिए ऊपरी आकर्षण से ज़्यादा ईमानदारी और गहराई मायने रखती है। स्थिर स्नेह और साझा मूल्य देने वाले साथी के साथ ये वफ़ादार, समर्पित साथी बनते हैं जिनकी जड़ें एक बार जम जाएँ तो जीवन भर मज़बूत रहती हैं।
कुंडली मिलान में
मूल राक्षस गण, आदि नाड़ी और कुत्ता योनि का नक्षत्र है। मिलान में ये तीनों जीवनसाथी के नक्षत्र से मिलाए जाते हैं: जीवनसाथी की नाड़ी भी आदि हो तो नाड़ी दोष बनता है; उसका गण देव या मनुष्य हो तो गण दोष बनता है, पर दोनों राक्षस गण के हों तो नहीं; और योनि कूट में दोनों के पशुओं का मेल देखा जाता है। कई बार दोनों कुंडलियों की दूसरी बातें दोष को काट देती हैं, इसलिए कोई नक्षत्र अपने आप में मिलान को अच्छा या बुरा नहीं बनाता। पूरी बात इस पेज पर है: कुंडली मिलान कैसे होता है।
मूल छह गंडमूल नक्षत्रों में से एक है, जो उन तीन गाँठों (गंड) पर हैं जहाँ राशि और नक्षत्र एक साथ ख़त्म होते हैं। आम गणना में सिर्फ़ गाँठ वाला चरण गिना जाता है - मूल का पहला चरण - हालाँकि कुछ परिवार पूरे नक्षत्र को गंडमूल मानते हैं, इसलिए जन्म के ठीक समय से फ़ैसला परिवार के पंडित जी करते हैं। परंपरा मानती है कि गाँठ पर जन्म बच्चे के परिवार के लिए, ख़ासकर माता-पिता के लिए, कठिनाइयाँ ला सकता है। यह जन्म से जुड़ी बात है, मिलान की नहीं, और 36 गुणों में इसकी गिनती नहीं होती।
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